एक दिन व्हाट्सएप पर


रश्मि अग्रवाल


 


जब से परिचय हुआ व्हाट्सएप से,
दुनिया ही बदल गई तब से।
आज झटपट बात पहुँच जाती उन तक,
पहुँचाना चाहते हैं जिन तक।
परंपराएँ बदल रहीं, परिवर्तन की बेला में,
छोटे से उपकरण ने धूम मचा दी,
दिमाग़ के हर कोने में।
बधाई मिलती थी पहले,
पास आकर/जाकर-
हौले से हाथों को दबाकर,
उपहार दिए जाते थे सौग़ातों में,
सजीव हों या निर्जीव
हाथों में थमाकर।
आज....
गिला-शिकवा हो या बधाई,
गुलदस्ता हो या मिठाई
भेज दी जाती है व्हाट्सएप पर।
ये तो कुछ भी नहीं
सुनो!
इससे आगे की,
विवाह हो या वर्षगाँठ,
जन्म दिन या मरणदिन
सुख-दुःख सभी,
बाँट लिए जाते हैं व्हाट्सएप पर।
जानते हैं परिणाम क्या होगा?
एक दिन 
जिन भावनाओं के साथ,
निमंत्रण पत्र भेजा जाएगा,
उन्हीं भावनाओं के साथ 
शगुन भी भेज दिया जाएगा।
वैज्ञानिक परिवर्तन की ना पूछो बात,
एक दिन हनीमून भी-
मना लिया जाएगा व्हाट्सएप के साथ।
भले ही इन सबका रंग-रूप स्वाद न ले पाएं हम,
पर दूर बैठ कर भी काम चला लिया जाएगा,
एक दिन व्हाट्सएप पर।